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Sunday, November 11, 2018

NOTA means None Of The Above

We witness polls in five states and we had an assembly poll on November 12, 2018, in our state in two phases one is on November and other is on December 20, 2018. Well, all the political parties contesting election are doing their best to woo the voters to secure their position in the assembly and their constituencies.

This blog aims at talking about a provision the election commission has introduced since 2013. That is NOTA.

What is NOTA ?:-

NOTA is an abbreviation of “None Of The Above” which is actually an option given by apex court and the election commission to the voters to express their dissatisfaction over the rest of the candidates contesting the election in the particular constituency.  Using the option in the EVM the voters can disapprove the candidates who are contesting election a constituency.
In 2009, the ECI (Election Commission of India) had asked the Supreme Court to offer this option on electoral ballots, but the government had opposed to it. Later, in September 2013 the Supreme Court ruled that every voter should have the right to register a “None Of The Above” vote. The option has been in EVM( Electronic Voting Machine) since then.
Let’s talk about its use and significance here.
Every time the question arises “what is the use of NOTA?”  
NOTA, apparently give people an opportunity to express their disapproval. This, in turn, increases the chances of more people turning up to cast their votes, even if they do not support any candidate and decreases the count of bogus votes.

 Does a NOTA promote “Nihilism” in democracy?

NOTA is “right to register a negative opinion” about the candidates contesting the election. This option is based on the principle that “consent requires the ability to withhold consent in an election”

What is the importance of the NOTA:-

NOTA Symbol (photo Google)
The Election Commission clarified that votes cast as NOTA are counted, but are considered “invalid”. Therefore, votes made to NOTA will not change the outcome of the election. The former Chief Election Commissioner SY Quraishi quoted” Even if there are 99 NOTA votes out of a total of 100, and candidates X gets just one vote, X is the winner, have obtained the only valid vote. The rest will be treated as invalid or no votes.”
Also, a bench headed by the then-Chief Justice of India P. Sathasivam said negative voting could bring out “a systematic change in the polls and political parties will be forced to project clean candidates”

How to cast vote as NOTA?

At the bottom of the list of candidates, EVMs have an option titled NOTA.  You need to press the button and express your disapproval “NONE OF THE ABOVE.
Please vote for the better governance.



Sunday, October 28, 2018

Electoral Code of Conduct

 छत्तीसगढ़ राज्य में चुनावों को घोषणा हो चुकी है और इसके साथ ही चुनावी आचार संहिता यानि electoral code of conduct की शुरुआत भी हो चुकी है / छात्रों से बातचीत  के दौरान ये प्रश्न आया कि electoral code of conduct क्या है ? तो जो मैंने चर्चा की उसी चर्चा की बिन्दुओं को आप तक इस ब्लॉग के माध्यम से पंहुचा रहा हूँ /
फोटो- गूगल 
वैसे हमारे क्षेत्र में चुनाव दो चरणों में किया जाना है / और कुल 90 विधानसभा क्षेत्र आते है / जिसमे जगदलपुर भी एक है /  

तो विषय में आते है-- देखिये ऐसा है कि चुनावों की घोषणा होते ही आचार संहिता भी लागू हो जाती है / आचार संहिता में क्या होता है ? क्या सावधानियां पोलिटिकल पार्टियों को रखना चाहिए थोड़ी इस पर चर्चा करते है  /

क्या है उद्देश्य आचार संहिता का ?

इसका प्रमुख उद्येश ये है कि सत्ता पक्ष चुनाव परिणामों को अपने पक्ष में न कर सके और चुनाव निष्पक्ष रूप से किये जा सके ताकि सभी राजनितिक दल आश्वस्त हो कि चुनाव परिणाम में कोई धांधली नही हुई है / और ये संहिता यानी नियम सभी राजनितिक दलों, उम्मीदवारों , सरकारी कर्मचारियों और चुनाव एजेंट्स लागू होती है /

क्या है आदर्श आचार संहिता के मायने ?

आचार संहिता का सीधा मतलब है कि नियम कायदों का एसा समूह जिसमे चुनाव के दौरान उम्मीदवारों एवं राजनितिक दलों की गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सके / हालाँकि, इसका कोई संवैधानिक आधार नही है न ही इसे क़ानून द्वारा लागू  किया जा सकता है /
फोटो- गूगल 

कब लागू की जाती है आचार संहिता ?

चुनाव की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाती है मगर 2001 में चुनाव आयोग तथा सरकार के बीच हुए समझौते के अनुसार चुनाव के लगभग तीन सप्ताह पहले ही इसे लागू किया जा सकता है /
पहली बार 19 71 के आम चुनाव में आचार संहिता के ज़िक्र आया था जिसमे निष्पक्ष चुनाव हेतु एक एसी प्रक्रिया के बारे में सोचा गया था जिसमे राजनितिक दलों की गतिविधियों के सुनिश्चित किया जा सके /

क्या बंदिशे लग जाती है आचार संहिता के दौरान :-

इसमें राजनितिक दलों , उम्मीदवारों शासकीय कर्म चारियों पर कुछ बंदिशे लग जाती है जिसका पालन करना अनिवार्य हो जाता है अन्यथा उन्हें सवैधानिक कारवाही से गुज़रना पड़ सकता है –खास तौर पर राजनैतिक दलों – उनकी मान्यता तक रद्द हो सकती है या उन्हें चुनाव से वंचित किया जा सकता है, इत्यादि/

खैर जानते है क्या और किनके लिए कैसे –कैसे नियम  है/

सबसे पहले बात करते है राजनितिक दलों की –

1.       धार्मिक स्थानों का प्रयोग चुनाव प्रचार की लिए नही किया जाना चाहिए /
2.       मतदाताओ को लुभाना वर्जित है जैसे रिश्वत या उपहार इत्यादि के रूप में /
3.       बिना अनुमति के किसी नागरिक की वक्तिगत दीवार या घरों में प्रचार न लिखे / अगर ज़रूरी हो तो गृह स्वामी से अनुमति ले कर ही करें /
4.       किसी अन्य दल की सभा या जुलुस में बाधा न डालें /
5.       राजनितिक दल कोई अपील जारी न करें जिससे धार्मिक भवनाये आहत हों /
6.       अगर सभा करनी हो तो इसकी पूर्व सूचना पुलिस अधिकारीयों को दें और दल पहले ही ये पता कर लें के वो स्थान वर्जित या निषेध तो नही है /
7.       सभा स्थल पर लाउडस्पीकर की अनुमति पहले से ही प्राप्त कर लें /
8.       जुलुस सडक के दायी ओर से निकले और यातायात प्रभावित न हो इस बात का ख्याल रखें /

सत्ताधारी पार्टी के लिए नियम

1.       कर कलापों में शिकायत का मौका न दें
2.       मंत्री शासकीय दौरों में चुनाव प्रचार न करें और न ही शासकीय कर्मचारियों का गलत इस्तेमाल न करें /
3.       शासकीय वाहनों का चुनावी कार्यों के लिए उपयोग न करें और हेलिपैड पर एकाधिकार न दिखाएँ / कैबिनेट की बैठक नही करें /
4.       ट्रांसफर के लिए चुनाव आयोग की अनुमति से ही करें
5.       कोई नए कार्य की घोषणा न करें/

शासकीय कर्मचारियों के लिए :-

1.       किसी उम्मीदवार के एजेंट के रूप में कार्य करें
2.       मंत्री यदि निजी आवास में ठहरते है तो मंत्री के बुलाने पर भी वहां न जाएँ
3.       ड्यूटी को छोड़कर किसी भी सभा में न जाएँ
4.       राजनितिक दलों को सभा के लिए स्थान देते समय भेदभाव न करें

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Thursday, October 18, 2018

What is Leap Year?

सीबीएसई की क्लास VI की एक किताब मै देख रहा था / उसमें पृथ्वी की गति और मौसम क्यों और कैसे प्रतिवर्ष बदलता है इसके बारे में विस्तार से बताया गया था / उसमे एक ख़ास बात ये लिखी थी कि प्रतिवर्ष क्यों फरवरी 28 दिन का होता है ? और चार वर्ष के बाद ही क्यों फरवरी का महिना 28 से 29 दिन का हो जाता है ?
पृथ्वी की गति (फोटो- गूगल) 

बहरहाल ! ये तो सभी जानते है की चार साल के बाद फरवरी का महिना 29 दिन का हो जाता है / और उस वर्ष को अधि-वर्ष यानि इंग्लिश में “लीप इयर” कहते है /

क्या है लीप ईअर ? क्यों फरवरी का महिना चार साल के बाद 29 दिनों का हो जाता है ? इसकी चर्चा करने के लिए ही मै ये ब्लॉग लिख रहा हूँ /

कैलेंडर का इतिहास :-

इसके बारे में समझने से पहले हमें अपने कैलेंडर का इतिहास समझना पड़ेगा /
दरअसल ! हम आज जो कैलेंडर देख रहे है वो मूलतः रोमन कलेंडर है, मलतब ये कि इसका इजाद रोमन वासियों ने किया था /   और जब ये कलेंडर बना था तो उसमे जनवरी और फरवरी महीने का नामो निशान नही था , दुसरे शब्दों में हम समझें कि साल की शुरुआत मार्च से होती थी और दिसम्बर तक ही चलती थी / यानि 10 महीनो का ही साल होता था आज की तरह बारह महीनो का नही /
फरवरी में अधिवर्ष यानि लीप इयर (फोटो- गूगल) 
 और खास बात ये भी है कि  साल भर में केवल 304 दिन ही हुआ करते थे / फिर रोमन विद्वानों ने गणना की और काफी जाँच पड़ताल के बाद उन्हें महसूस होने लगा कि क्यों मौसम अपने नियत तिथि पर नही आ रहा है और फिर इसके बाद ही दो और महीनो का नामकरण (यानि जन्म हुआ )/ फिर बना एक “जनवरी” और “ फरवरी”, मगर ये 355 दिनों का हो रहा था जो विषम संख्या थी /

मौसम  और त्योहारों की गणना फिर गलत साबित हो रही थी / बाद में इन्होने सोचा मार्च में ज्यादा और फरवरी में दो दिन कम कर के देखते है ! देखा तो पाया की कुछ हद तक गणना सही आ रही है मगर हर चार साल के बाद फिर वही गलती हो रही थी/ फिर मार्च 31 और फरवरी  28 दिन का बन तो गया मगर चार साल का प्रॉब्लम बना ही रहा / अब क्या?

क्यों होता है चार साल बाद फरवरी का 29 दिन ?


फिर सोचा गया! वैज्ञानिक गणना की गई, और ये पाया गया की पृथ्वी पर होने वाले मौसम परिवर्तन में बहुत कुछ  जिम्मेदार पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर घुमने से भी है / जो दरअसल में 365 दिन और 6 घंटे का होता है / यानि पृथ्वी सूर्य का पूरा एक चक्कर लगाने में 365 दिन और 6 घंटे लगाती है /

सुविधा के हिसाब से 6 घंटे को नज़र अंदाज़ कर दिया जाता था, फिर हुआ यूँ कि ये 6 घंटे का यह  अंतर चार साल में पुरे 24 घंटे का अंतर हो जाता था यानी एक पूरा दिन- इसीलिए हर चार साल में एक दिन को जोड़ना ज़रूरी हो गया और फिर ये एक्स्ट्रा एक दिन फरवरी के हिस्से में ही आया / इस तरह फरवरी में हर चार साल में 29 दिन होने लगे और इस एक दिन के उछाल को लीप इयर यानी अधि वर्ष कहा जाने लगा

अब आगे जो कलेंडर आने वाले है उनमे क्या बदलाव आएगा ये तो वक्त ही बताएगा  !

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Thursday, September 20, 2018

नेट फ्लिक्स का इतिहास

मैंने अपने पिछले ब्लॉग "वीडियो स्ट्रीमिंग क्या है " में स्ट्रीमिंग की चर्चा की थी जिससे आपको पता तो चल गया होगा की स्ट्रीमिंग क्या है  / 
नेट फ्लिक्स मुख्यालय कलिफ़ोर्निया (फोटो -गूगल ) 
कृपया क्लिक कर डिटेल जानकारी ले लीजिये !
"वीडियो स्ट्रीमिंग क्या है "


नेट फ्लिक्स में क्या होता है ? 


अब आइये थोड़ी चर्चा कर ली जाए कि “नेट फ्लिक्स” क्या है ?


ये भी youtube या अन्य विडिओ स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म की तरह है /इसमें आपको डायरेक्ट लाग इन करके एक महीने के लिए फ्री में फिल्म वगैरह देख सकते है मगर इसके बाद आपको subscription यानि पैसा देना होगा / लाग इन करते समय आपसे कार्ड डिटेल पूछता है जिसे आपको भरना पड़ेगा –
अगर आप पैसा नही देना चाहते तो कुछ दिन पहले जाकर अपना subscription कैंसिल कर दीजिये नही तो आपके अकाउंट से पैसा अपने आप कट जायेगा ( थोडा टैक्स भी लगता है लगभग 800 में 70 रुपया  )


क्या है subscription के प्लान ? 

subscription के तीन प्लान है

बेसिक (500 रूपये

 स्टैण्डर्ड650 रूपये

 और प्रीमियम 800 रूपये
फिल्म गेम ऑफ़ थ्रोन (फोटो-गूगल) 

बेसिक में HD नही देख सकते और सिंगल यूजर होता है जबकि स्टैण्डर्ड में डबल यूजर होता है और HD है मगर अल्ट्रा HD नही देख सकते और प्रीमियम प्लान में 4 लोग एक साथ अलग-अलग जगहों पर देख सकते है HD और अल्ट्रा HD है न मजेदार बात /

( खुल के बात करू तो चार दोस्त प्रीमियम प्लान लेकर अपने अपने घर में एक साथ मन चाही फिल्म का आनंद ले सकते है सस्ता भी पड़ेगा )

नेट फ्लिक्स की खास बातें :-


नेट फ्लिक्स दुनिया भर में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला विडिओ स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म है /

इसकी स्थापना सन 1997 में मार्क रैदोल्फ़ और रीड ह्स्टिंग ने स्कॉट वैली कलिफ़ोर्निया में की यानि ये अमेरिकन कंपनी है /

ये पहले DVD किराये पर देने का काम करती थी जब इसकी मांग बड़ी तो “विडिओ ऑन डिमांड” की सर्विस शुरू की यानि लोगों की मांग पर अपनी पसंदीदा फिल्म दिखाने  का काम शुरू कर दिया
बाद में 2007 में स्ट्रीमिंग की सेवा शुरू कर दी इस कंपनी के सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 2012 का था / इस वर्ष सबसे पहले अपनी सीरिज नेट फ्लिक्स ने पेश किया जिसका नाम था “लिली हैमर” लोगों ने इसे बहुत पसंद किया और ये दुनिया का पसंदीदा प्लेटफार्म बन गया 2016 में सबसे ज्यादा original content देने वाला प्लेटफार्म बन गया फिर ये इतनी प्रसिद्ध हो गई कि अप्रैल 2018 तक इसके पुरे विश्व में 13 करोड़ यूजर बन गए //

कृपया मेरे ब्लॉग इंग्लिश में जानने के लिए निचे लिंक पर क्लिक कीजिये ! 

FACE TO FACE

Upendra Singh Thakur




Wednesday, August 29, 2018

डेंगू बुखार और इससे बचाव !

पिछले कुछ दिनों से समाचार पत्रों में डेंगू (DENGUE ) बुखार  की काफी खबरे आ रही है , इसका भयावह रूप एसा की अब तक इस बीमारी से 29 लोगों की जान जा चुकी है /
डेंगू का विकराल रूप
 बस्तर में प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार पिछले पखवाड़े में 14 मरीज मिले है / इसी बात की चर्चा करने के लिए मै  ये ब्लॉग आप तक पहुचने का प्रयत्न कर रहा हूँ ,क्योकिं आजकल यही चर्चा है ?
डेंगू बुखार और इससे बचाव ! 

क्या है डेंगू और कैसे होता है ?  :-

कहते है किसी बीमारी को अगर भागना हो तो सबसे पहले उसके कारणों को खोज कर उसे दूर करें तो आप बच सकते है , अलग-अलग चिकित्सकों से चर्चा करने पर ये पता लगा कि  ये मच्छरों से ही फैलते है , चिकित्सक दो ही बातों पर जोर देते है कि अगर डेंगू से छुटकारा पाना हो तो 

  • मच्छरों को ज्यादा पनपने न दें 
  • और न ही खुले बदन (खास तौर पर बच्चे )ज्यादा देर रहें / क्योकि ये मच्छरों से फैलता है मच्छरों के काटने से चार से सात दिनों में ही ये बुखार आपको जकड़ लेगा /


आइये बात करते है इसके लक्षणों के बारे में:-

क्या है डेंगू के लक्षण

लक्षणों की बात करें तो सबसे पहले इससे मरीज़ को बुखार होता है और चिकत्सकों की माने तो बुखार   104 F डिग्री तक होता है इसके आलावा निम्नलिखित में  से कोई दो लक्षण देखने को अवश्य मिलेंगें:-

सिरदर्द
मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द
जी मचलना
उल्टी
आँखों के पीछे दर्द
ग्रंथियों में दर्द
शरीर पर दाने

हालाँकि इन बताये गए लक्षणों से मरीज़ एक से दो हफ्ते में ही उबर जाता है मगर ये सभी लक्षण ज्यादा हो तो मरीज़ की मृत्यु तक हो जाती है क्योकि ब्लड वेसल(धमनियां /रक्त वाहक शिराएँ )  या तो नष्ट हो जाते है या छेड़ हो जाते है

डेंगू के प्रकार

ध्यान दीजिये!  डेंगू बुखार के तीन प्रकार होते है / और इसके वायरस चार प्रकार के( जिनका 1 2 3 4 नाम ही दिया गया है )

तीन प्रकार के डेंगू के नाम क्या है ?

1 साधारण बुखार
2 डेंगू हेमोरोजिक  बुखार  (DHF )
3 डेंगू शॉक सिड्रोम (DSS)

छत्तीसगढ़ के भिलाई में हुए मौते तीसरे प्रकार के डेंगू कारण हुई है जिससे शरीर के कई अंग पर सीधा असर डालते है /

साधारण डेंगू बुखार :- उपर दिए गए लक्षण ही साधारण  डेंगू के होते है
तो इस पर मै ज्यादा रौशनी नही डालता , वैसे ये स्वतः ही ठीक हो जाने वाले लक्ष्ण है/

मगर दूसरा (DHF )और तीसरे  (DSS) प्रकार के डेंगू ज्यादा खतरनाक होते है / अगर सही समय पर इलाज नहीं हुआ तो मरीज़ जी मौत निश्चित है /
तो पहले इनके लक्षणों पर बात करते है फिर इनके उपचार पर/

डेंगू हेमोरोजिक  बुखार  (DHF ) के लक्षण :-

1 साधारण बुखार के लक्षणों के साथ साथ इस प्रकार के डेंगू में मल से तथा नाक मसूड़े से खून निकलता है
2. चमड़ी पर गहरे नीले -काले रंग के चकते बनते है जिनसे खून रिसने लगता है / डॉक्टर इसे मरीजों को “टोर्निके टेस्ट” लिखते है और जब मरीज़ के “टोर्निके टेस्ट” में पॉजिटिव परिणाम आता है तो उसे DHF है 

 डेंगू शॉक सिड्रोम (DSS) के लक्षण :-

1 इसमें मरीजो के उपरोक्त लक्षणों के आलावा “शॉक” आने के लक्षण नज़र आता है
2.  बुखार के बावजूद मरीज़ को ठण्ड लगती है
३. ब्लड प्रेशर कम होने लगता है और मरीज़ होश खोने लगता है
तो ये थे तीनो प्रकार के डेंगू के लक्षण

 इससे कैसे बचाव करें  ?
How to get rid of Dengue
डेंगू से बचाव के उपाय 

अब आईये बात करते है इनका इलाज क्या है ?

कहते है होम्योपैथी में इसका सटीक टीका उपलब्ध है मगर एलोपैथी एसा कोई दावा नही करता

चिकित्सा विज्ञान कहता है  कि रोकथाम ही इसका सही इलाज है आइये जानते है कि कैसे आप इसको फैलने से रोक सकते है ?

सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि मच्छरों को किसी भी कीमत में पनपने न दे / चिकित्सक कहते है एंडीज मच्छरों के काटने से ये होता है तो ज़रूरी है मच्छरों को न तो पनपने दें और न ही काटने दें / तो क्यों न हम इसे हालत पैदा करें की मच्छर ही पैदा न हों .... तो कैसे ये संभव है ?
अपने आस पास को साफ़ सुथरा रखे मच्छरों को पैदा होने न दें 
1.        जहाँ भी घरों में या आसपास पानी ठहरता है वहां साफ़ सफाई रखे क्योंकि एडीज मच्छर ठहरे हुए पानी में ही पनपता है / सुनिश्चित करें की कूलर का पानी, नाली का रुका हुआ पानी , टायर में भरा हुआ पानी साफ़ रखे
2.          पानी की टंकी या अन्य आवश्यक ठहरे हुए पानी को ढक कर के रखे ताकि मच्छर न पैदा हों /
3.         यदि कूलर का पानी साफ़ करना संभव नही हो तो उसमे सप्ताह में एक बार मिटटी तेल या पेट्रोल की कुछ बुँदे डाल दें / (100 लिटर पानी के लिए 30 ml तेल या पेट्रोल पर्याप्त है /
4.           टंकियों में गैमम्बुजिया या लेबिस्टर मछली डाल सकते है ये मछलियाँ मच्छरों के अंडे को खा लेती है जिससे ये पैदा नही हो पाती /
5.      कपडे इस प्रकार पहने कि शरीर का अधिकांश भाग ढका हुआ रहे/ संभव हो तो डॉक्टर की सलाह से शरीर पर मच्छर विरोधी क्रीम का लेप लगा कर रखे
6.         कूड़ा या कचरे को घर के आस पास न फेकें , कुल मिलकर ये कहा जाता है कि उन हालातों को न प्रोत्साहित करें जिसने मच्छर पैदा हों
7.               सुबह –शाम को घर पर ज्यादा मच्छर आ जाते है अतः इस समय दरवाजे खिडकियों को बंद रखे /
8.               जुलाई से अक्टूबर में डेंगू वायरस अधिक सक्रीय रहता है , सोते समय मच्छर दानी का प्रयोग अवश्य कीजिये /
9.               सबसे महत्वपूर्ण बात – मरीज़ को मच्छर दानी के भीतर ही सोने दे , नही तो मच्छर उसे काट कर ,स्वस्थ व्यक्ति तक डेंगू वायरस फैला सकता है /
10.         बच्चों को हमेशा सावधान करे व रखें क्योंकि बच्चे ज्यादा ग्रसित होते है /
इन बातो का अवश्य ध्यान रखे तो आप डेंगू बुखार से बच सकते है /
याद रखिये बचाव ही रोकथाम है/

इंग्लिश में मेरे जानने के लिए नीचे  लिखे लिंक पर क्लिक कीजिये/ 
Face to Face

upendrasinghthakur




Saturday, August 11, 2018

Gunda Dhur who fought against injustice in Bastar

15 अगस्त को पूरा देश आजादी की वर्षगांठ मनाता है, हम अनगिनत कुर्बानियों के बाद  200 साल की गुलामी से आजाद हुए, अब हमारी आज़ादी की  72 वर्षगांठ पर मै अपने अंचल के शहीदों को भी नमन करता हूँ जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ मोर्चा खोला और ब्रिटिश अन्याय का डटकर मुकाबला किया -  /
Image of Gunda Dhur at village Netannar
इन्ही में से एक है शहीद गुंडा धुर -जिनके नाम पर आज न जाने कितनी संस्थाए अपनी पहचान बना चुकी है / 

आज की पीड़ी शायद गुंडाधुर के नाम से भली भांति परिचित होगी, इस अवसर पर अपने ब्लॉग के माध्यम से ग्राम नेतानार के गुन्डाधुर के योगदान को मै याद करता हूँ, और नमन करता हु/  

 कौन है गुंडा धुर:- 

वैसे तो इतिहास में एक रिबेलियन के तौर पर यह नाम दर्ज है, 1910 के दरम्यान बस्तर में ब्रिटिश हुकूमत के लिए यह नाम खौफ का पर्याय था, जहाँ एक तरफ क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव, राम प्रसाद बिस्मिल का नाम  उत्तर भारत में क्रन्तिकारी गतिविधियों के संचालन में तो दर्ज है तो दूसरी तरफ बस्तर जिले के  कांगेर के जंगलो में हुई विद्रोह की  अगुवाई करने में गुंडा धुर का नाम सबसे पहले  लिया जाता है , उनके साथ उनके साथी मूरत सिंह बक्शी , बालाप्रसाद नज़ीर तथा कलंदरी थे का नाम भी बड़े सम्मान से लिया जाता है  /
Gaurav Path at Rajnandgaon 

गुंडा धुर ने अपने 50 से ज्यादा आदिवासी लोगों के साथ 1910 में ब्रिटिश साम्राज्य से मुकाबला किया था , और अंग्रेजो को बस्तर से खदेड़ने के हर संभव प्रयास किये /

19 10 के विद्रोह में गुडा धुर की भूमिका क्या थी ?

जब ब्रिटिश सरकार ने कांगेर के दो तिहाई जंगलों को रिज़र्व घोषित कर दिया तो आदिवासी भड़क उठे और वे सभी अग्रेजो के खिलाफ हो गए क्योकि इस व्यवस्था से उनके हित बुरी तरह प्रभावित हो रहे थे , उन्होंने धीरे धीरे संगठित होना शुरू किया , आदिवासियों को एक जुट करने में गुंडा धुर की अहम् भूमिका थी 18 57 की क्रांति में जिस तरह कमल एवं चपाती के सहारे क्रांति का सन्देश भेजा जाता था ठीक उसी तरह,  लाल मिर्च, मिट्टी, तीर धनुष व आम की टहनी सन्देश वाहक का प्रतिक थी /

गुंडा धुर की अगुवाई में यह फैसला लिया गया कि एक परिवार से एक  सदस्य को ब्रिटिश हुकूमत से लड़ने के लिए भेजा जायेगा ,गुंडा धुर की नेतृत्व में ये योद्धा ब्रिटिश अनाज के गोदामों को लुटते और उसे गरीबों में बाँट देते थे / इसके आलावा स्थानीय जमींदार और नेताओं द्वारा किये जाने वाले अन्याय के खिलाफ भी गुंडा धुर ने आवाज़ उठाई थे /

ब्रिटिश की दमनकारी नीति :

गुडा धुर और उनके टोली ब्रिटिश हुकूमत के लिए एक चुनौती थी / कई बार ब्रिटिश सेना को गुफाओं में शरण लेनी पड़ी,
जब गुंडा धुर ने बात चीत करनी चाही तो ब्रिटिश सेना ने गावों और गुडा धुर की टुकड़ी पर हमला कर दिया , हालाँकि , ब्रिटिश सेना विजयी हुई मगर वह गुंडा धुर को पकड़ने में कामयाब नही हो सकी / गुडा धुर के इसी प्रयास की वजह से कांगेर जंगलों के सम्बन्ध में लिया गया फैसला ब्रिटिश सरकार को वापस लेना पड़ा / और गुडा धुर ब्रिटिश को बस्तर से खदेडने में कामयाब रहे /


गुडा धुर की इस लड़ाई को भूमकाल के नाम से जाना जाता है आज गुडाधुर के नाम से सरकार ने कई शैक्षणिक संस्थाए व संगठन संचालित है / स्वाधीनता की  72 वीं वर्षगाठ पर गुडा धुर को सलाम !